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उत्तराखंड को बिहार बनाने वाला कौन है अतीक, किसने 25 साल पहले बाजपुर चीनी मिल के जीएम का हरिद्वार में रोका रास्ता, बोक्सा जनजाति की हड़पी जमीनें, सिक्खों के साथ जमीनों की धोखाधड़ी
देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा के एक नेताजी आज खुद के साथ शोषण होने का रोना रो रहे हैं। जबकि हकीकत ये है कि इन नेताजी पर ही हमेशा बोक्सा, सिक्ख परिवारों के साथ अन्याय, शोषण का आरोप रहा है। बाजपुर चीनी मिल नेताजी की गुंडई का अड्डा रहा। यूपी बिहार से लाकर लोगों को यहां बसा कर अपना गुंडई का साम्राज्य खड़ा क्या। अवैध खनन के कारोबार पर नकेल कसने से नेताजी परेशान हैं। इसी तरीके से पार्टी को ब्लैकमेल किया जा रहा है।
इन्हीं विधायक पर आज से 25 साल पहले बाजपुर चीनी मिल के जीएम का हरिद्वार में रास्ता रोक देख लेने की धमकी का आरोप रहा। यूएसनगर में तैनात कई डीएम, एसडीएम, तहसीलदार, एसएसपी, एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर इनकी गुंडई के न सिर्फ भुगतभोगी रहे, बल्कि कई दहशत में भी रहे हैं। ढाई दशक बाद आज पहली बार नेताजी को भीगी बिल्ली बने देख रहे हैं।
25 साल पुरानी उस घटना को याद कर आज भी उन बाजपुर चीनी मिल के उन तत्कालीन जीएम की भुकृटी तन जाती है। बकौल, तत्कालीन जीएम, उस दिन वे देहरादून से काम निपटा कर अपने सरकारी वाहन से बाजपुर की ओर जा रहे थे। तभी हरिद्वार पुल पार करते हुए नेताजी के वाहनों के काफिले उनके वाहन को ओवरटेक कर रोक लिया। सीधे जीएम को कार से बाहर निकाल धमकाने लगे। बाजपुर चीनी मिल में नेताजी के चेलों की गड़बड़ियों से आंखे बंद करने को लेकर धमकाया गया। हर तरह की धमकी और लाइफ थ्रेट तक दिया गया।
गुंडई की ये कोई एक अकेली घटना नहीं है। एसएसपी आवास पर पेशाब करना, कोतवाली में इंस्पेक्टर के ऊपर पेशाब करने समेत एक अनुसूचित जनजाति के तहसीलदार के साथ मारपीट जैसी तमाम घटनाएं गुंडई के तमाम उदाहरण है। इसके अलावा 2014 में भाजपा प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी रहे हों या 2019 के प्रत्याशी अजय भट्ट, कोई भी इनके विरोध, साजिशों से नहीं बच पाया।
26 मार्च 2019 में नामांकन वाले दिन कुंडेश्वरी थाने में समर्थकों के साथ मिलकर जमकर बवाल किया। पुलिस चौकी इंचार्ज अर्जुन गिरी गोस्वामी के साथ अभद्रता, मारपीट तक के आरोप लगे। सिर्फ खनन कारोबारियों के समर्थन में हुए बवाल ने नेताजी की कलई खोल कर रख दी। नेताजी की गुंडई सिर्फ यहीं नहीं थमी, बल्कि बोक्सा जनजाति की जमीनों को खुर्द बुर्द किया। पहले इन जमीनों पर कब्जा किया गया, उसके बाद नियम विरुद्ध इन जमीनों को गलत तरीके से अपने नाम कर गरीब, आदिवासियों को भूमिहीन बना दिया गया। घपला यहीं नहीं थमा। बल्कि जमीन खुर्दबुर्द करने के बाद उन जमीनों को सिक्ख समाज को बेच दिया। आज आदिवासी समाज समेत सिक्ख समाज को संकट में खड़ा कर दिया है।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक विवादों में कांग्रेस का रवैया सामने आ रहा है। कांग्रेस को इस मामले में आक्रामक रुख दिखाते हुए आदिवासी समाज की जमीनों को खुर्दबुर्द करने वाले भाजपा नेता के खिलाफ हमला बोलना था। उल्टा कांग्रेस भाजपा के इन विवादित नेता के समर्थन में खड़े हो गए हैं। इस पूरे मामले में अब बोक्सा, सिक्ख समाज भी कांग्रेस के इस रवैये के खिलाफ हो गया है। ऐसे विवादित भाजपा नेता को कांग्रेस में लाने का भी अंदरखाने विरोध हो गया है। अब नेताजी की हालत घर का न घाट की हो गई है। जिस कांग्रेस को थारु, बोक्सा आदिवासियों के समर्थन में खड़ा होना था। वही कांग्रेस आरोपी नेता के साथ खड़ी नजर आ रही है। इससे कांग्रेस के नीति निर्धारकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अंदरखाने कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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By amit