– भागीरथी नदी विकास प्राधिकरण में पहली बार नदी घाटी क्षेत्र के विधायक व प्राधिकरण के सदस्यों की बैठक बुलाकर प्राधिकरण को गति देने पर हुई चर्चा
भागीरथी नदी घाटी प्राधिकरण देहरादून में अरसे बाद प्राधिकरण के कार्य क्षेत्र के विधायकों के साथ बैठक कर ठप पड़े प्राधिकरण में फिर से जान फूंकने पर चर्चा हुई। नव नियुक्त उपाध्यक्ष रामसुंदर नौटियाल की अगुवाई में प्राधिकरण में यह दूसरी महत्वपूर्ण बैठक हुई है, इससे पूर्व सचिवालय में भी संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ प्राधिकरण की बैठक में लंबे से लंबित पड़े प्रस्तावों को फिर से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। अब आज हुई बैठक में भागीरथी घाटी क्षेत्र में अपने खनिज अधिकारों, विद्युत परियोजनाओं से उपार्जित आय में हिस्सेदारी और राज्य सरकार की ओर से वित्तीय सहायता पर लंबे समय बाद चर्चा हो सकी।
शुक्रवार को भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रामसुंदर नौटियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्राधिकरण क्षेत्र के विधायकों संग प्राधिकरण सीईओ समेत अन्य विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्राधिकरण के अधिनियम की धारा-31 (1) व (2) के अंतर्गत प्राधिकरण को नदी घाटी खनिज अधिकारों हेतु उपकर लगाने के अधिकार का उपयोग करने की जरूरत बताई गई जिससे प्राधिकरण की आय का जरिया खुल सके और और इससे मिलने वाली धनराशि को प्राधिकरण क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च किया जा सका। हालांकि, यहां फैसला अब राज्य सरकार को लेना है कि उक्त धारा के तहत उपकर लगाया जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में प्राधिकरण की अगली बैठक शीघ्र ही बुलाई जाएगी।
यूं तो नदी घाटी क्षेत्र में निर्मित जल विद्युत परियोजनाओं से होने वाली आय का 20 फीसद हिस्सा निगमों को प्राधिकरण को देना था लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय से ठप पड़ी हुई है। बैठक में इस बात पर चिंता जताते हुए संबंधित विधायकों और प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने उत्तराखंड नदी घाटी (विकास और प्रबन्ध) अधिनियम, 2005 की धारा-12 की उपधारा (4) के अंतर्गत निगमों की ओर से संबंधित मद में धनराशि का भुगतान करने का विषय मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का फैसला लिया। गौतलब है कि यदि प्राधिकरण अधिनियम के तहत भागीरथी नदी घाटी क्षेत्र में निर्मित जल विद्युत परियोजनाओं से पैदा बिजली से होने वाली आय का 20 फीसदी हिस्सा प्राधिकरण को नियमानुसार दिया जाता तो प्राधिकरण की आर्थिक हालत खस्ता न होती तो साथ ही प्राधिकरण अपनी सीमा के अतंर्गत विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकता। इस मुद्दे पर उपस्थित विधायकों ने एकमत से सहमति व्यक्त करते हुए यह विषय राज्य सरकार के समक्ष उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण को प्राप्त होने वाली निर्धारित 20 प्रतिशत धनराशि शीघ्र अवमुक्त कराई जानी चाहिए ताकि क्षेत्रीय विकास कार्यों को गति मिल सके।
बैठक में यह भी बल दिया गया कि भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिनियम की धारा-8 में उल्लिखित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करने की जरूरत बताई गई। बैठक में गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी अपर सचिव विनोद गिरी गोस्वामी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी धीरेंद्र कुमार सिंह, वित्त अधिकारी शैलेन्द्र बुटोला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



