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अंकिता के हत्यारों को रहना होगा सलाखों के पीछे, जमानत खारिज, सीएम धामी के सख्त रुख से अंकिता को मिला न्याय
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में बुधवार, 19 अगस्त को हाईकोर्ट से आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हो गई है। बुधवार को हाईकोर्ट से जमानत खारित होना सिर्फ कोर्ट का एक फैसला भर नहीं है, बल्कि यह सीएम पुष्कर सिंह धामी की सख्ती का असर है। कोर्ट में सरकार की ओर से की गई मजबूत पैरवी के कारण आरोपी अभी भी जेल ही रहेंगे। इसे सीएम धामी का देवभूमि की बेटी को न्याय दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम माना जा रहा है। सीएम धामी के इस सख्त रुख के कारण ही बेटी अंकिता को न्याय मिल पया है।
इस पूरे घटनाक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कड़ा और अडिग रुख प्रदेश की जनता के लिए विश्वास का सबसे बड़ा स्तंभ साबित हुआ है। मामले की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कर दिया था कि यह मामला केवल एक बेटी का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की अस्मिता, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा है।
जब इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, तब मुख्यमंत्री धामी ने बिना किसी दबाव या हिचकिचाहट के सख्त निर्णय लिए। एसआईटी का तेजी से गठन किया। अफसरों को जांच में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए। इससे साफ हो गया कि सीएम धामी अपराधियों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहे हैं।
हाईकोर्ट में जमानत याचिका के विरोध में अभियोजन पक्ष द्वारा मजबूती से रखे गए तथ्य और साक्ष्य इस बात को दर्शाते हैं कि राज्य सरकार ने कानूनी धरातल पर भी किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होने दी। उत्तराखंड की जनता लगातार इस मामले में निष्पक्ष न्याय की मांग कर रही थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार का यह संकल्प रहा है कि पीड़िता के परिवार को हर संभव न्याय मिले। हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने से यह साबित हो गया है कि धामी सरकार के कड़े रुख और मजबूत पैरवी के कारण ही अपराधी सलाखों के पीछे रहने को मजबूर हैं।
यह फैसला इस बात का भी प्रतीक है कि उत्तराखंड में कानून का राज सर्वोच्च है। मुख्यमंत्री धामी ने अपने इस कड़े रुख से न केवल अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ पैदा किया है, बल्कि राज्य की बेटियों को यह भरोसा दिलाया है कि देवभूमि में उनकी सुरक्षा और सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का यह सफर अभी जारी है, लेकिन उच्च न्यायालय के इस रुख और राज्य सरकार की अडिग निष्ठा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंसाफ की इस लड़ाई में जीत सिर्फ और सिर्फ सत्य और न्याय की ही होगी।

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By amit