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इस सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता कि उत्तराखण्ड के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए नकल माफिया को 7 वर्ष से लंबा समय बीत चुका है। 2016 से शुरू हुआ भर्ती परीक्षा के पेपर लीक करने का सिलसिला 2022 तक बदस्तूर जारी रहा।

दरअसल, उत्तराखण्ड में 2015–16 में उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग का गठन इसलिए किया गया था कि सरकारी सेवाओं खासतौर पर समूह ‘ग’ के पदों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हों और सुयोग्य युवा सरकार के मुलाजिम बन सकें। लेकिन हुआ इसके उलट। उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की शुरुआती परीक्षाओं में ही नकल माफिया ने सेंधमारी कर दी। शिकायत हुई पर कारवाई नाममात्र की यानि खानापूर्ति साबित हुई। ऐसे में माफिया के हौसले बुलंद हो गए और उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग पर उसका इतना प्रभाव हो गया कि पेपर उसके इशारों पर बनने और छपने लगे।

माफिया के नेटवर्क से जुड़ने वाले लोग बेरोजगार युवाओं और उनके अभिभावकों को झोली भरकर सपने बेचने लगे। मनमाने दाम पर नौकरी का सौदा करने लगे। 2016 से 2021 तक पेपर लीक होने की तमाम शिकायतें शासन–प्रशासन से की गईं लेकिन हर बार मुकदमा दर्ज कर दोषियों को बचाने का खेल खेला गया। इसी बीच Pushkar Singh Dhami को पहली और फिर दूसरी बार सरकार की कमान मिली तो उन्होंने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया। एक ऐसी परीक्षा जो दिसंबर 2021 में उनके पहले कार्यकाल में हुई थी उसमें हुई धांधली की शिकायत की विजिलेंस, SIT और फिर STF से जांच करवाकर मुख्यमंत्री धामी ने सबको सकते में डाल दिया। वे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पूर्व से लेकर अपने कार्यकाल में हुई भर्ती धांधली में निष्पक्ष, प्रभावी और कठोर कार्रवाई की। पेपर लीक कारनामे में संलिप्त तकरीबन 60 लोग सलाखों के पीछे डाल दिए गए।

जेल जाने वालों में नकल माफिया सादिक मूसा से लेकर आयोग के पूर्व अध्यक्ष Dr. RBS RAWAT (Ret. IFS) तक शामिल हैं। और तो और मुख्यमंत्री धामी ने पार्टी लाइन से बाहर निकलकर युवाओं के भविष्य को तरजीह देते हुए अपनी पार्टी भाजपा के एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह और हरिद्वार ग्रामीण के पूर्व मंडल अध्यक्ष संजय धारीवाल तक को जेल में ठूंस दिया। पहली बार सफेदपोश, नौकरशाह और माफिया के गठजोड़ पर हुआ यह एक्शन विपक्ष के साथ ही भाजपा के कुछ लोगों को भी रास नहीं आया। बुरी तरह अखर गया। नकल गिरोह पर की गई कारवाई से सत्ताधारी दल के कुछ अति महत्वाकांक्षी और विघ्नसंतोषी नेता भी बिफर गए। मुख्यमंत्री धामी को घेरने के लिए भर्ती घोटाले में शामिल जमात एकजुट हो गई। अपने और परायों ने सिर से सिर मिलाकर साजिश रचते हुए उन बेरोजगार युवाओं को ही बरगलाना शुरू कर दिया जो लंबे समय से माफिया की करतूत का दंश झेल रहे हैं। ये बात इसलिए दावे के साथ कही जा सकती है क्योंकि जब धामी सरकार की विजिलेंस, SIT और STF बगैर किसी भेदभाव और दवाब के कार्रवाई करते हुए माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है तो फिर अनावश्यक इन मामलों की CBI जांच की मांग क्यों की जा रही है, वो भी एकतरफा रट और जिद के साथ।

जबकि धामी न सिर्फ माफिया की कमर तोड़ चुके हैं बल्कि नकल विरोधी कानून बनाकर भविष्य के लिए leak proof व्यवस्था भी बना रहे हैं। धामी की मंशा पर सवाल इसलिए नहीं उठाया जा सकता क्योंकि सब जानते हैं कि परीक्षा साफ सुथरे तरीके से हों इसके लिए उन्होंने ‘उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग’ से परीक्षाओं को आयोजित करने का जिम्मा हटाकर ‘उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग’ को सौंप दिया। लेकिन हुआ यह कि ये जिम्मेदारी मिलते ही लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पहली भर्ती परीक्षा (पटवारी) का भी पर्चा लीक हो गया। धामी सरकार चाहती तो इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर पूर्व की सरकारों की तरह मामले में लीपापोती की सकती थी, लेकिन धामी ने बोल्ड निर्णय लेते हुए प्रकरण की जांच, मुकदमा दर्ज करने और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए। इस नए गड़बड़झाले में भी अब तक 3 लोग गिरफ्त में आ चुके हैं।

सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि ये तमाम कारवाई बेरोजगार महासंघ की शिकायतों पर की गई। इन्हें लेकर जब भी बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार मुख्यमंत्री धामी से मिले उनकी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लिया गया। घोटाले में शामिल लोगों का गिरेबान पकड़कर उन्हें सलाखों के पीछे धकेला गया। ऐसे में तो बेरोजगार युवाओं को मुख्यमंत्री धामी का आभार जताते हुए जांच में सरकार का भरपूर सहयोग करना चाहिए था लेकिन इसके उलट बेरोजगार युवा कुछ लोगों के बहकावे में आकर सरकार के खिलाफ ही अपनी ऊर्जा लगाने लगे। वो सिर्फ सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं। क्या ये काबिलेगौर नहीं है कि रात के अंधेरे में कुछ पुलिस कर्मियों ने गांधी पार्क में गांधीवादी तरीके से धरना दे रहे बेरोजगारों (खासतौर पर अध्यक्ष बॉबी पंवार) को क्यों बलपूर्वक उठाने का प्रयास किया, उनको क्यों छेड़ा गया, उनसे अभद्रता की गई और फिर पुलिस कर्मियों की इस करतूत के वीडियो रातों रात इतने बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर वायरल कर देते गए। इस साजिश का ही तो परिणाम है कि सुबह होते–होते हजारों बेरोजगार घंटाघर के आसपास इकट्ठा हो गए। इन अप्रत्याशित घटनाक्रमों से ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इस षडयंत्र में कुछ नौकरशाहों की भी मिलीभगत रही है। जरा सोचिए ! जब उत्तर प्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्य नकल माफिया से पार पाने में असफल हैं तो उत्तराखण्ड में माफिया पर की जा रही करवाई कैसे तत्काल रूप से प्रभाव दिखा सकती है ? क्या ये किसी से छिपा है कि नकल माफिया का गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और उसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं कि धामी सरकार द्वारा की जा रही ठोस करवाई के सुखद परिणाम भविष्य में जरूर देखने को मिलेंगे। इसके लिए किसी के बहकावे में आए बगैर धैर्य के साथ सरकार का साथ देना भी एक सकारात्मक विकल्प है। गौर तो इस बात पर भी करना पड़ेगा कि मुख्यमंत्री धामी के प्रभावी प्रयासों को कौन लोग पलीता लगा रहे हैं ? बेरोजगारों पर लाठीचार्ज करने में तत्परता दिखाने वाले पुलिस अधिकारियों को भी तत्काल दंडित किया जाना चाहिए।
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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें