ख़बर शेयर करें -

चुनाव दर चुनाव बढ़ रही वोटों की बर्बादी

-2002 में 0.08 प्रतिशत तो 2017 में 1.31 प्रतिशत बर्बाद हुए वोट

-विस चुनाव 2017 के आंकड़ों में बर्बाद वोट में नोटा मत भी शामिल

अरविंद शेखर

देहरादून भले ही चुनाव आयोग मतदाता जागरुकता के जितने भी अभियान चला रहा हो लेकिन प्रदेश में चुनाव दर चुनाव बर्बाद होने वाले वोटों की संख्या बढ़ती जा रहा है। पहले चुनाव में जहां ऐसे वोट महज 0.08 फीसद थे। 2017 आते आते 1.31 फीसद तक पहुंच गए। 2017 के आंकड़ों में बर्बाद वोटों में नोटा वोट भी शामिल है क्योंकि नोटा वोट किसी के भी समर्थन में नहीं होता हालांकि कहा यह भी जाता है कि नोटा वोट जितने बढ़ते हैं उससे सरकारों को एंटी इनकंबेंसी से लड़ने में मदद मिलती है क्योंकि वह वोट सरकार के पक्ष में नहीं जाता को विरोधी के पक्ष में भी नहीं। बहरहाल, बात सबसे पहले विस चुनाव यानी 2002 की। 2002 में प्रदेश में कुल 5270375 मतदाता थे, जिनमें 2713347 पुरुष व 2557078 महिला मतदाता थी। पुरुषों में से 55.95 फीसद यानी 1517984 ने मतदान किया। जबकि महिलाओं में से 54.34 प्रतिशत यानी 1345902 ने वोट किया। इस तरह कुल 2863886 यानी 54.34 फीसद वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। कुल वैध वोट 28614492 पाए गए और 2254 यानी 0.08 फीसद वोट अवैध पाए गए यानी खारिज हो गए।

दूसरे यानी यानी 2007 के विस चुनाव में प्रदेश में कुल 5985302 मतदाता थे, जिनमें 3038991 पुरुष व 2946311 महिला मतदाता थी। पुरुषों में से 58.95% फीसद यानी 1791391 ने मतदान किया। जबकि महिलाओं में से 59.45% प्रतिशत यानी 1751589 ने वोट किया। इस तरह कुल 3558043 यानी 59.45%फीसद वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। कुल वैध वोट 3773300 पाए गए और 3978 यानी 0.11 फीसद वोट अवैध पाए गए यानी खारिज हो गए।

2012 के विस चुनाव में प्रदेश में कुल 6377330 मतदाता थे, जिनमें 3352984 पुरुष व 3024346 महिला मतदाता थी। पुरुषों में से 64.41 फीसद यानी 2159501 ने मतदान किया। जबकि महिलाओं में से 68.12 प्रतिशत यानी 2060193 ने वोट किया। इस तरह कुल 4219694 यानी 66.17 फीसद वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। ईवीएम, पोस्टल बैलेट मिलाकर कुल वैध वोट 4250314 पाए गए और 11235 यानी करीब 0.27 फीसद वोट अवैध पाए गए यानी खारिज हो गए।

2017 के विस चुनाव में प्रदेश में कुल 7606688 मतदाता थे, जिनमें 3998319 पुरुष व 3608228 महिला व 141 थर्ड जेंडर मतदाता थी। पुरुषों में से 61.11 फीसद यानी 2443367 ने मतदान किया। जबकि महिलाओं में से 68.72 प्रतिशत यानी 2060193 और थर्ड जेंडर में 13 यानी महज नौ फीसद ने मतदान किया। इस तरह कुल 4922860 यानी 64.72 फीसद वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। ईवीएम, पोस्टल बैलेट मिलाकर कुल वैध वोट 4925055 पाए गए और 14196 फीसद वोट अवैध पाए गए यानी खारिज हो गए। इसी तरह ईवीएम से नहीं निकलने वाले, टेस्ट वोट व खारिज वोट व नोटा मिलाकर 50439 वोट किसी के पक्ष में नहीं गए। कुल मिलाकर 64635 लोगों के वोट यानी 1.31 फीसद वोट बर्बाद हो गए। 2022 यानी इस बार के चुनाव के आंकड़े आने अभी बाकी हैं।

चुनाव वर्ष बर्बाद वोट प्रतिशत में

2002 2254 00.08

2007 3978 00.11

2012 11235 00.27

2017 64635 01.31

Ad Ad Ad Ad

By amit

You missed

*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें