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*धामी सरकार में पारदर्शिता से प्रतिभावान को मिल रही नौकरी पर नौकरी*

*-बड़ी संख्या में पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने पास की पीसीएस परीक्षा-*

*अकेले 17 नायब तहसीलदारों ने प्रतिभा के बल पर पास की पीसीएस परीक्षा*

*-समूह ग की परीक्षा में भी 30 से 40 फीसद अभ्यर्थियों ने पास की 2 से चार परीक्षाएं*

*-कांग्रेस सरकार में सिफारिश से एक ही परिवार को मिलती थी चार-चार नौकरी*

*-सख्त नकलरोधी कानून और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया से प्रतिभावान को मौके*

देहरादून। राज्य में सख्त नकलरोधी कानून और सरकार की पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया प्रतिभावान अभ्यर्थियों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। धामी सरकार के महज तीन साल के कार्यकाल के भीतर जहां समूह ग में 40 फीसद युवाओं ने सरकारी नौकरी की दो से चार परीक्षाएं पास की हैं, वहीं पीसीएस परीक्षा परिणाम के बाद भी पहले से नौकरी कर रहे युवाओं ने परीक्षा पास कर टॉप पदों पर नौकरी पाई है। इनमें अकेले 17 नायब तहसीलदार हैं, जिन्होंने पीसीएस परीक्षा पास की है। ऐसे में यहां अतिश्योक्ति नहीं होगी कि धामी सरकार में प्रतिभावान युवाओं को प्रतिभा से नौकरी पर नौकरी मिल रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के सख्त नकलरोधी कानून और पारदर्शी परीक्षा नीति के परिणाम दिखने लगे हैं। समूह ग में न केवल समय पर परीक्षा और परिणाम बल्कि नियुक्ति पत्र मिलने के राज्य में रिकॉर्ड बन गए हैं। वहीं, पारदर्शी परीक्षा से 30 से 40 फीसद प्रतिभावान युवाओं ने एक नहीं बल्कि दो से चार नौकरी की परीक्षा पास की हैं। अकेले यूकेपीएससी की परीक्षाओं में 448 युवाओं ने दो से ज्यादा नौकरी की परीक्षा पास की हैं। जबकि यूकेएसएसएससी में यह संख्या कई गुना ज्यादा है। खासकर पटवारी, क्लर्क, फॉरेस्ट गार्ड, रेंजर से लेकर विभिन्न विभागों में नौकरी पाने में युवाओं ने मेधा का परिचय दिया है। अब पीसीएस परीक्षा का परिणाम जारी हुआ तो यहां भी पहले से नायब तहसीलदार, समीक्षा अधिकारी, आबकारी निरीक्षक, ईओ, शिक्षक जैसे पदों पर कार्यरत अभ्यर्थियों ने एसडीएम, डीएसपी, वित्त अधिकारी आदि टॉप पदों पर परीक्षा पास की है। इससे स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार का सख्त नकलरोधी कानून युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। इससे पहले राज्य में नकल करके और सिफारिश से एक ही परिवार को चार चार नौकरी मिलती थी। लेकिन अब कठोर नकलरोधी कानून से एक अभ्यर्थी चार से पांच नौकरी की परीक्षा पास कर प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है।

17 नायब तहसीलदारों ने पास की पीसीएस परीक्षा

राज्य में गत दिवस जारी पीसीएस में प्रतिभावान अभ्यर्थियों ने सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। जोशीमठ में नायब तहसीलदार आशीष जोशी ने महज दो साल के भीतर चौथी नौकरी एसडीएम जैसे पद पर टॉप कर अपनी मेधा का प्रदर्शन किया है। इसी तरह आबकारी निरीक्षक पंकज भट्ट, अधिशासी अधिकारी वैभव कांडपाल, समीक्षा अधिकारी मुकेश जोशी, बिजनौर में प्रशिक्षु एसडीएम आकांक्षा गुप्ता, अक्षिता भट्ट, नायब तहसीलदार रोबिन राणा, अलकेश नौडियाल आदि ने एसडीएम समेत टॉप पदों पर नौकरी पाई है इनमें अकेले 17 अभ्यर्थी जो पहले से ही नायब तहसीलदार हैं, जिन्होंने पीसीएस परीक्षा पास की हैं। जबकि प्रतिभावान सोनिया सिंह, सौम्य गबर्याल, अनिल रावत जैसे युवाओं की लम्बी फेहरिस्त है, जिन्होंने पहले ही प्रयास में पीसीएस की टॉप नौकरी प्राप्त की है।

राज्य में नकल माफियाओं की तोड़ी कमर

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कमान संभालते ही सबसे पहले नकल माफिया की कमर तोड़ी है। मुख्यमंत्री धामी ने वर्षों से दीमक की तरह मेहनती और काबिलियत रखने वाले युवाओं की नौकरी पर डाका डालने वाले नकल माफियाओं का नेस्तनाबूद किया। करीब 60 से ज्यादा नकल माफियाओं को सलाखों के भीतर डाला। राज्य में देश का सबसे कठोर नकलरोधी कानून लाते हुए युवाओं के हितों की रक्षा पर फैसला लिया। नतीजन, परिणाम भी सबके सामने आने लगे। जो परीक्षाओं में पहले सिफारिश और नकल माफियाओं से एक एक परिवार को चार नौकरी मिलती थी, अब उन नौकरियों में मेहनती और काबलियत वाले युवाओं को सफलता मिल रही है।

युवाओं को प्रतिभा के बूते मिल रही मनपसंद नौकरी

सरकार के निर्णय का परिणाम है कि युवाओं को समय पर न केवल नौकरी मिली बल्कि एक साथ दो से ज्यादा परीक्षाएं पास करने से मनपसंद नौकरी का विकल्प भी मिला। युवाओं को नौकरी मिलने की यह रफ्तार अभी भी जारी है। बहरहाल उत्तराखंड में धामी सरकार के तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियां नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।

पीसीएस, लोअर पीसीएस समेत अन्य पदों पर बड़ी संख्या में युवाओं ने दो से ज्यादा नौकरी की परीक्षा पास की है। आयोग में इस तरह के मामले पहली बार देखे जा रहे हैं। खासकर दो से ज्यादा परीक्षा पास करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पारदर्शी परीक्षा प्रकिया और सख्त नकलरोधी कानून का परिणाम है कि युवाओं को प्रतिभा के अनुरूप नौकरी मिल रही है।

जीएस रावत, सचिव, यूकेपीएससी, उत्तराखंड

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By amit

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