ख़बर शेयर करें -

धामी सरकार की दिल को छूने वाली एक उपलब्धि …

पुराने साल की विदाई और नूतन वर्ष के आगमन की बेला पर सरकार का भी बही खाता खोला जाता है। देखा जाता है कि प्रदेश ने क्या खोया, क्या पाया। सरकार की क्या उपलब्धियां रहीं और कहां चूक हुई इस पर भी खूब बातें होती हैं। खासतौर पर जब सफलता गिनाई जाती हैं तो चर्चा हाईवे, रेलवे लाइन, फ्लाई ओवर, स्टेडियम पर आकर सीमित हो जाती है। लेकिन संवेदनशील सरकार की कुछ उपलब्धियां दिल को छूने वाली होती हैं। ऐसी उपलब्धियां जिसमें अनाथ, बेसहारा और गरीब तबके का कल्याण छिपा होता है। धामी सरकार की भी एक उत्कृष्ट उपलब्धि आपको बताने जा रहा हूं। बजट के लिहाज से इस उपलब्धि का आकार छोटा है लेकिन इसमें संवेदनाओं पर आधारित वृहद लोक कल्याण छिपा हुआ है।

अनाथ, घुमन्तू, भीख मांगने वाले, कूड़ा बिनने वाले, बे आसरा और बे सहारा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उत्तराखण्ड में एक शानदार योजना है ‘नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय योजना’। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों को छात्रावास में रखकर उन्हें निशुल्क भोजन, आवास, शिक्षण सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है और उन्हें सुधारात्मक व रोजगारपरक शिक्षा प्रदान की जाती है। मौजूदा समय में प्रदेश में 13 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास है जिनमें कुल 879 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami का इन बच्चों के प्रति अपार स्नेह और लगाव है। अपना जन्मदिन हो या परिजनों का, वह इन्हीं छात्रावासों में आकर अनाथ, बे सहारा और बे आसरा बच्चों के साथ सेलिब्रेट करते हैं। पिछले साल जब वह आराघर देहरादून में स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि 100 बच्चों की क्षमता वाले इस छात्रावास में पूरे 100 बच्चे हैं लेकिन उनके लिए यहां रहने की पर्याप्त सुविधा नहीं है, खुला स्पेस नहीं है। मुख्यमंत्री धामी ने मौके पर ही घोषणा की कि आराघर के साथ ही अन्य छात्रावासों में रह रहे सभी बच्चों के लिए तमाम सुविधाओं से सुसज्जित नये छात्रावास बनाए जाऐंगे। उसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने 2 जनवरी 2023 को कौलागढ़ देहरादून में नए छात्रावास की नींव रखी। इसके लिए तत्काल तकरीबन 4.10 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया। अब जबकि 1 जनवरी 2024 को शिलान्यास के बाद ठीक एक वर्ष का समय हुआ है तो आज मुख्यमंत्री धामी इस छात्रावास का शिलान्यास कर रहे हैं। इस छात्रावास का निर्माण मिशन मोड में हुआ। शिक्षा महानिदेशक Banshidhar Tiwari समय समय पर निर्माण कार्य की मॉनीटरिंग और समीक्षा करते रहे। उन्होंने इसमें स्पेशल इंट्रेस्ट लिया। अनाथ, बे सहारा और बे आसरा बच्चों के चेहरे पर खुशी लाने वाली और उनके जीवन को सुधारने वाली ये उपलब्धि क्या कम बड़ी है ?


By amit

You missed