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छात्रों को गुमराह करने वालों से एक सवाल, बताएं सीएम पुष्कर धामी की सरकार से पहले क्यों नहीं हुई नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई, क्यों नहीं बना सख्त नकलरोधी कानून, क्यों जेल नहीं भेजे गए हाकम जैसे माफिया, कार्रवाई करने वाली ही सरकार पर किस साजिश के तहत उठाए जा रहे सवाल

देहरादून। भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाने और छात्रों को गुमराह करने वालों से एक सीधा सा सवाल है कि आखिर ये हंगामा आज से पहले क्यों नहीं बरपाया गया। क्यों ये आवाजें तब खामोश रहीं, जब 2002 से लेकर जून 2021 तक सरकारी नौकरियां नीलाम होती रहीं। पेपर लीक होते रहे। आयोग में खुलकर भर्ती फर्जीवाड़ा चलता रहा। तब क्यों लोग सड़कों पर नहीं उतरे। जवाब दिया जाए कि आखिर धामी सरकार से पहले कब नकल माफिया की गरदन दबोचने का काम हुआ। क्यों सख्त नकलरोधी कानून नहीं बनाया गया। क्यों हाकम सिंह जैसे माफिया जेल नहीं भेजे गए। आज जब सरकार 60 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेज चुकी है। सख्त कानून बना चुकी है, तो उस पर उठाए जा रहे सवाल सीधे तौर पर एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।
सरकार पिछले एक साल से नकल माफिया के खिलाफ युद्धस्तर से काम कर रही है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग समेत लोक सेवा आयोग के नकल माफिया समेत 60 से अधिक लोगों को जेल पहुंचाया जा चुका है। देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाया जा चुका है। ऐसे में युवाओं का आक्रोश, सड़कों पर पथराव समझ से परे है।
उत्तराखंड में राज्य गठन से ही नकल और भर्ती माफिया सक्रिय रहा। एनडी तिवारी सरकार में दरोगा भर्ती घोटाला, कभी तकनीकी विवि भर्ती घपला, मंडी परिषद भर्ती घपला कांग्रेस सरकार में हुआ। इसके बाद की भाजपा सरकार में आयुर्वेद चतुर्थ श्रेणी भर्ती घपला, जेई भर्ती घपला, यूपी, बिहार, दिल्ली के लोगों को जल निगम में नियम विरुद्ध भर्ती किया गया। ऊर्जा निगम, यूजेवीएनएल में भर्ती फर्जीवाड़ा हुआ। लेकिन किसी भी मामले में न कोई कार्रवाई हुई, न ही कोई जांच। 2012 से 2017 और 2017 से 2020 तक अधिनस्थ सेवा चयन आयोग, लोक सेवा आयोग की भर्ती में बड़े पैमाने पर भर्ती फर्जीवाड़ा हुआ। खानापूर्ति को जांच बैठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। युवा साल दर साल ठगे चले आते रहे। 2019 में नकल माफिया हाकम सिंह और उसके साथियों के खिलाफ मंगलौर थाने में मुकदमा दर्ज होता है, लेकिन जांच को बंद कर दिया जाता है। हाकम सिंह और उसके साथियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
इन तमाम फर्जीवाड़ों के खिलाफ जुलाई 2021 के बाद कार्रवाई शुरू होती है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सरकारी महकमों की भर्ती सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे नकल माफिया के खिलाफ अभियान शुरू किया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की एक के बाद एक भर्ती में हुई गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया। 50 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा। सभी नई पुरानी भर्तियों की जांच बैठाई। यही सिलसिला लोक सेवा आयोग में जारी रखा। जहां भी भर्ती का फर्जीवाड़ा सामने आया, तत्काल कार्रवाई में देरी नहीं की। साथ ही लोक सेवा आयोग को तेजी के साथ भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए। इन आदेशों के क्रम में आयोग ने भर्तियां भी शुरू की।
इसी के साथ नकल माफिया के हौसले पस्त करने को देश का सबसे सशक्त नकल विरोधी कानून लाने का ऐलान किया। ये कानून 15 फरवरी की कैबिनेट में आने जा रहा है। इसमें जेल, संपत्ति जब्त, दोबारा भर्ती में बैठने पर प्रतिबंध लगाने समेत कई सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। इसके बाद भी राजधानी की सड़कों पर युवाओं का आक्रोश समझ से परे हैं। जानकारों को इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक साजिश की बू आ रही है। क्योंकि जिस तरह नकल माफिया के खिलाफ सीएम धामी लगातार हमले कर रहे हैं, उससे उनका युवाओं में क्रेज बढ़ रहा है। यही वो सबसे बड़ी वजह है, जो विरोधियों को परेशान किए हुए है। ऐसे में इस बार युवाओं की मजबूती को ही उनके खिलाफ इस्तेमाल करने की साजिश रची जा रही है। युवाओं को ही भ्रमा कर उनके खिलाफ किए जाने की साजिश रची जा रही है।

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें