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*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश — आपदा प्रबंधन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।*

*ग्राउंड जीरो पर उतरें अधिकारी, जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता— मुख्यमंत्री।*

*बिजली, पेयजल, सड़क और संचार सेवाएं तत्काल बहाल हों, हर जिले में 24×7 अलर्ट मोड पर रहें सभी जिलाधिकारी एवं एजेंसियां।*

*डेंगू रोकथाम पर युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश, जलभराव और गंदगी पर तत्काल कार्रवाई के आदेश।*

*चारधाम यात्रा, मानसून और आपदा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में हेली सेवा और राहत संसाधन पूरी तरह तैनात रखने के निर्देश।*

‘ *जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ का तीसरा चरण 15 सितंबर से नए स्वरूप में होगा शुरू, अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर।*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदों से अतिवृष्टि, मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें तथा प्रत्येक स्थिति पर सतत निगरानी बनाए रखें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान प्रत्येक अधिकारी को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहना होगा। किसी भी प्रकार की आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में होने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय एवं राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराई जाए तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से जिलेवार सड़कों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, चारधाम यात्रा मार्गों, यात्रियों की संख्या तथा विभिन्न धामों में व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। इसलिए यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का राज्य में आगमन उत्तराखण्ड के प्रति लोगों की आस्था का प्रमाण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और संतोषजनक यात्रा का अनुभव लेकर लौटे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण तथा तकनीकी दल तैनात किए जाएं ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में जीपीएस एवं आधुनिक संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। किसी भी विभाग द्वारा यह नहीं कहा जाना चाहिए कि सूचना समय पर नहीं मिली या संसाधन उपलब्ध नहीं थे। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी स्थान पर भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण बिजली, पेयजल अथवा संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो उनकी बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आमजन को मूलभूत सुविधाओं से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

उन्होंने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए। जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हेली सेवा उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

डेंगू की रोकथाम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। डेंगू के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाते हुए स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, युवा मंडलों, महिला समूहों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। प्रत्येक नागरिक को यह समझाया जाए कि अपने घरों एवं आसपास पानी जमा न होने दें।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी जनता के बीच जाएं, समस्याओं का समाधान करें और प्रत्येक स्थिति की व्यक्तिगत निगरानी करें। जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है और उस विश्वास को बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गत वर्ष आई आपदाओं से संबंधित जिन कार्यों को पूरा किया जाना था, उनमें से कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण एवं सुरक्षात्मक कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पिछले वर्ष स्वीकृत सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों तथा उनकी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा नगर में संचालित मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी जनपदों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले सभी विकास कार्यों की विस्तृत सूची एवं उनकी वर्तमान प्रगति तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन कार्यों में बाधाएं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर उनका समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार द्वारा की गई सभी मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घोषणा समयबद्ध ढंग से धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। जनता के बीच की गई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। जिन विभागों में कार्यों की गति धीमी है, वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्यभर में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम ने सरकार और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस अभियान का तीसरा चरण आगामी 15 सितंबर से नए स्वरूप और अधिक प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए अभी से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं है, बल्कि सरकार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, उसकी समस्याओं का मौके पर समाधान हो तथा प्रमाण पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व संबंधी सेवाएं और अन्य सुविधाएं सरलता से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों को केवल औपचारिकता न बनाया जाए। प्रत्येक शिविर का परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। आमजन को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता के प्रति उत्तरदायी बनना ही सुशासन की पहली शर्त है। प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की स्थिति कमजोर है, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाए। किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी शहरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नालों की विशेष सफाई अभियान चलाया जाए ताकि जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। जहां भी जल निकासी बाधित है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान जलभराव से होने वाली समस्याओं को हर हाल में रोका जाए।

मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध कराए जाएं ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण तथा आपातकालीन संसाधन पूरी तरह तैयार रहें। स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें।

*मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सरकार द्वारा विभिन्न जन सेवाओं के लिए चलाए जा रहे दूरभाष नंबरो पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रत्येक परिस्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए है और आमजन की सुरक्षा एवं सुविधाओं के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।*

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। सभी अधिकारी स्वयं पौधारोपण करें तथा समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व है और इसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें बल्कि नियमित रूप से ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि प्रशासन हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाया जाए। किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में सभी एजेंसियां एक टीम के रूप में कार्य करें ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनधन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना नहीं है, बल्कि आपदा से पूर्व प्रभावी तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक विभाग को हर समय सतर्क रहना होगा। किसी भी चुनौती का सामना केवल बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और जिम्मेदार कार्यशैली से ही किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून की स्थिति पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए “गोल्डन ऑवर” का विशेष ध्यान रखा जाए और प्रभावित क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच तत्काल सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है और शासन की प्राथमिकता भी। उन्होंने दोहराया कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा कोई भी विषय लंबित नहीं रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के कार्यों की नियमित समीक्षा करेगी। जिन अधिकारियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा |

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों तथा सामाजिक संगठनों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करें, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से ही आपदा प्रबंधन को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाना है। इसके लिए सभी विभागों को उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी स्वयं को जनता के प्रति जवाबदेह समझे और अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक एवं श्री सतपाल महाराज, आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रोहिल्ला, सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, सचिव श्री विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी देहरादून श्री आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी, श्री विनीत कुमार सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वर्चुअल माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, पेयजल, नगर निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें