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कौन हैं, जिन्हें है सीएम पुष्कर धामी के उत्तराखंड के योगी, शिवराज, रमन और वसुंधरा बनने से है दिक्कत, क्यों प्रचंड बहुमत की सरकार लाने वाले धामी के आगे बढ़ने से है दिक्कत

देहरादून। एक लंबे समय बाद उत्तराखंड के लोगों को लग रहा है कि उन्हें शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, वसुंधरा राजे सिंधिया, योगी आदित्यनाथ की तरह एक मजबूत नेतृत्व सीएम पुष्कर सिंह धामी के रूप में मिल गया है। यही वो कारण है, जिसने न सिर्फ भाजपा, बल्कि कांग्रेस को भी असहज कर दिया है। यही वजह है, जो प्रचंड बहुमत की धामी सरकार को महज लगातार अस्थिर करने की साजिशें रचने का काम शुरू हो गया है। इस षड़यंत्र में पक्ष, विपक्ष सब शामिल हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने अपने महज छह महीने के पहले कार्यकाल के दम पर उत्तराखंड में दोबारा सरकार बनाने के मिथक को तोड़ा। विधानसभा चुनाव में भी वे अपनी सीटों तक सिमट कर रह जाने वाले बड़े नेताओं की तरह नहीं रहे। बल्कि उन्होंने अपनी सीट को छोड़ कर पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार किया। इसी का खामियाजा उन्हें अपनी सीट पर हुए जबरदस्त भीतरघात के कारण हुई हार के रूप में भुगतना पड़ा।
इसके बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी ने उन पर भरोसा जताया और दोबारा कमान सौंपी। कुर्सी संभालते ही उन्होंने ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू किए। कॉमन सिविल कोड, जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाया। देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाया। मजबूत सख्त भू कानून का ड्राफ्ट तैयार कर एक लंबी लकीर खींची। पहली बार किसी सरकार ने अपने घोषणा पत्र में की गई घोषणा को लागू किया। सरकार ने गरीबों को तीन रसोई गैस सिलेंडर देना सुनिश्चित किया।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के खपलेबाज माफियाओं को जेल की सलाखों के भीतर भेजा। एक दो नहीं, बल्कि 60 से अधिक लोगों को सलाखों के पीछे जेल भेजा। प्रमुख वन संरक्षक और पूर्व सीएम के सलाहकारण रहे आरबीएस रावत जैसे वटवृक्ष को उखाड़ फैंकते हुए जेल भेजा। कन्याल, पोखरिया समेत अन्य भ्रष्ट अफसरों को भी जेल भेजा। संतोष बढ़ोनी को निलंबित किया। इससे पुष्कर धामी के बढ़े कद ने विरोधियों को परेशान कर दिया। इसी बढ़ते कद की काट करने को पक्ष, विपक्ष या कहें ज्यादा पक्ष के विरोधियों ने भर्ती घपले के पूरे विवाद को आयोग से हटा कर विधानसभा की ओर मोड़ने की साजिश रची।
इस पूरे विवाद को तूल देने वाले चंद लोगों के कनेक्शन भी चौंकाने वाले हैं। ये बड़े नाम हमेशा आपदा में अवसर तलाशने की फिराक में रहते हैं। इन्होंने ही विधानसभा भर्ती विवाद में रायता फैलाने का काम किया। एक तीर से सरकार को अस्थिर करने के साथ ही आरएसएस में अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने का प्रयास किया। विधानसभा विवाद में पक्ष के तमाम अन्य नेता भी अपने लिए अवसर तलाशने में जुटे। एक को तो बाकायदा बेहद ईमानदार के रूप में मीडिया की एक लॉबी प्रोजेक्ट भी करनी लगी। हालांकि ये प्रोजेक्शन उन्हें भारी पड़ा और उनके परिजनों से जुड़े पुराने भर्ती विवाद एकबार फिर सतह पर आ गए।
इस पूरे मामले में धामी के पक्ष, विपक्ष के सभी विरोधियों को एक ही बात परेशान कर रही है कि यदि पुष्कर धामी के पैर जम गए, तो उन्हें अगले 15-20 साल उत्तराखंड की सियासत से कोई हिलाने वाला नहीं है। ऐसे में तमाम बड़े नेताओं का तो राजनीतिक भविष्य चौपट हो जाएगा। विपक्ष के लिए भी कोई मौका नहीं रहेगा। क्योंकि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, यूपी में योगी आदित्यनाथ और पूर्व में छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के रूप में ऐसा हो चुका है। राजस्थान में भी वंसुधरा के कद के नीचे दूसरी पांत पनप नहीं पाई। यही वो वजह है, जो सीएम धामी की मजबूत सरकार को लगातार अस्थिर करने की साजिशें रची जा रही हैं। वो भी उस मौके पर, जब उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती घपले में शानदार, ऐतिहासिक काम किया है।
नकल माफिया को जेल भेजने, लोक सेवा आयोग से पारदर्शी परीक्षा कराने, देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाने को लेकर जिन युवाओं, बेरोजगारों को सीएम धामी का स्वागत, सम्मान करना चाहिए था, उन्हें ही बरगलाकर विरोधियों ने सड़कों पर उतार दिया। जिस नेता के समय हाकम, आरबीएस रावत, कन्याल सरीखे लोगों को शह मिली, आज वही युवाओं से माफी मांगने का ढोंग कर रहे हैं।
विरोधियों की इस साजिश की केंद्रीय नेतृत्व को भी भनक लग चुकी थी। तभी इन साजिश करने वालों की मंशाओं को किनारे रख केंद्रीय नेतृत्व ने पुष्कर धामी को दोबारा राज्य की बागडौर सौंपी। बदरीनाथ धाम आकर पीएम नरेंद्र मोदी ने अकेले में दो घंटे सीएम धामी से बात कर बड़ा संदेश दिया। इसके कुछ समय बाद बेहद शॉर्ट नोटिस पर संसद भवन में सत्र के दौरान पीएम मोदी ने लंबी मुलाकात का समय दिया। पीएम मोदी जब भी सीएम धामी से मिले, तो दोनों के बीच गजब की बॉडिंग नजर आई। हर मुलाकात में बेहद आत्मीय भाव प्रदर्शित किया। इस तरह पीएम मोदी सार्वजनिक रूप से बार बार सीएम धामी को लेकर बड़ा संदेश देते रहते हैं। अंदरखाने भी सभी को सख्त संदेश भी जारी कर दिया गया है। साफ कर दिया गया है कि फिलहाल कोई अपने मन में किसी भी तरह का कोई विचार भी लाने का प्रयास न करें।

सीएम धामी के इन प्रयासों से विरोधियों में मची हुई है हलचल

पहली ही कैबिनेट में कॉमन सिविल कोड बनाने की घोषणा की, जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित

जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया

देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाया, दस करोड़ जुर्माना, आजीवन कारावास के सख्त प्रावधान

उत्तराखंड की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित किया

गरीबों को साल में तीन फ्री रसोई गैस सिलेंडर की सुविधा

कानून व्यवस्था मजबूत करने को छह नए थाने और 20 चौकियों का गठन

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें