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*धामी सरकार के नेतृत्व में उत्तराखण्ड बन रहा है फार्मा हब*
*मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई दवा निर्माताओं साथ अहम बैठक, अधोमानक दवा और अवैध गतिविधियों पर कड़ा रुख**
*सरकार फार्मा उद्योग के साथ है, लेकिन औषधियों की गुणवत्ता से नहीं किया जाएगा कोई समझौता- डॉ आर राजेश कुमार*

उत्तराखण्ड को भारत का फार्मा हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, आज खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन मुख्यालय, देहरादून में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में बुलाई गई थी। बैठक की अध्यक्षता अपर आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा राज्य औषधि नियंत्रक श्री ताजबर सिंह जग्गी ने की। बैठक में प्रदेश की 30 से अधिक दवा निर्माता इकाइयों के प्रतिनिधि, प्रबंध निदेशक, औषधि विनिर्माण एसोसिएशन के पदाधिकारीगण, और विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य था – राज्य में हाल ही में सामने आए अधोमानक औषधियों के मामलों की समीक्षा, औषधि गुणवत्ता की स्थिति का विश्लेषण, और औद्योगिक प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उठाए जा सकने वाले ठोस कदमों पर चर्चा।

*निर्माताओं ने जताई चिंता–बिना जांच ड्रग अलर्ट से उद्योग की छवि पर असर*
समीक्षा बैठक में उपस्थित दवा निर्माताओं ने सी.डी.एस.सी.ओ. (CDSCO) द्वारा जारी किए जा रहे ड्रग अलर्ट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कई बार बिना जांच की प्रक्रिया पूरी किए, ड्रग अलर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर डाल दिए जाते हैं, जिससे फर्म की साख और राज्य की छवि दोनों को नुकसान पहुंचता है। एक उदाहरण के तौर पर कूपर फार्मा के Buprenorphine Injection का ज़िक्र किया गया, जिसे अधोमानक और स्प्यूरियस घोषित किया गया था। बाद में जांच में पाया गया कि वह दवा उत्तराखण्ड की फर्म द्वारा बनाई ही नहीं गई थी, बल्कि बिहार में अवैध रूप से तैयार की गई थी। ऐसे मामलों में उत्तराखण्ड की कंपनियों को बिना किसी दोष के दोषी मान लिया जाता है, जो उद्योग और निवेश दोनों के लिए नकारात्मक संकेत देता है। कंपनियों ने यह भी कहा कि जब कोई नमूना अधोमानक पाया जाता है, तब औषधि अधिनियम की धारा 18(A) के अंतर्गत प्रारंभिक जांच और नमूने की सत्यता की पुष्टि अनिवार्य है। इसके बाद धारा 25(3) के तहत निर्माता को उस रिपोर्ट को चैलेंज करने का अधिकार होता है। परंतु जब तक रिपोर्ट और सैम्पल समय पर नहीं दिए जाते, तब तक यह अधिकार केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाता है।

*सरकार ने दी स्पष्ट चेतावनी–गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं*
बैठक में राज्य औषधि नियंत्रक श्री ताजबर सिंह जग्गी ने सभी दवा निर्माता कंपनियों को दो टूक कहा कि सरकार उद्योग के साथ है, लेकिन औषधियों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की दवा इकाइयों की छवि पूरे देश में बहुत सकारात्मक है और इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को अपने-अपने प्लांट्स में GMP (Good Manufacturing Practices) का कड़ाई से पालन करने, प्रोडक्शन की हर स्टेज पर रिकॉर्ड रखने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा।

*फार्मा सेक्टर को मिलेगा और मज़बूत समर्थन*
बैठक में मौजूद दवा निर्माताओं ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का आभार प्रकट किया और कहा कि धामी सरकार की पारदर्शी और उद्योग समर्थक नीतियों के कारण उत्तराखण्ड आज देशभर में निवेशकों की पसंद बन रहा है। कंपनियों ने भरोसा जताया कि अगर यही रुख बरकरार रहा तो आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड भारत का सबसे बड़ा फार्मा क्लस्टर बन सकता है।

*अधोमानक दवा और अवैध गतिविधियों पर कड़ा रुख*
समीक्षा बैठक में यह तय किया गया कि जो लोग अधोमानक दवाएं बनाकर राज्य की प्रतिष्ठा खराब कर रहे हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई में कोई ढील नहीं बरती जाएगी। विभाग द्वारा ऐसे मामलों की जांच की जा रही है, और दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

*विश्व स्तरीय गुणवत्ता पर पूरा फोकस*
राज्य के स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा व औषधि प्रशासन, डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा हमारा दृढ़ लक्ष्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में उत्तराखंड फार्मा हब के रूप में उभरे। इस दिशा में हम न केवल मौजूदा औषधि निर्माण इकाइयों के विस्तार पर काम कर रहे हैं, बल्कि नए निवेश, उद्योगों के लिए सुविधाजनक नीतियाँ और उच्च गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र तैयार कर रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में फिलहाल लगभग 285 फार्मा यूनिट्स सक्रिय हैं, जिसमें से 242 यूनिट्स डब्लूएचओ से सर्टिफाइड हैं। देश में उत्पादित कुल दवाओं का लगभग 20% हिस्सा उत्पादन करती हैं और ये फार्मा कंपनियां देश-विदेश को महत्वपूर्ण मात्रा में निर्यात भी कर रही हैं । उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में देहरादून में राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की सहयोग से स्थापित एक उच्च-तकनीकी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया, जिसमें दवाओं के साथ-साथ मेडिकल उपकरण और कॉस्मेटिक सैंपल्स की भी परीक्षण की व्यवस्था की गई है । इस प्रयोगशाला को शीघ्र ही NABL मान्यता भी प्राप्त होगी, जिससे यहां के रिपोर्ट्स का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानक बन जाएगा। डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अधोमानक औषधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

*उत्तराखण्ड गुणवत्तापूर्ण दवाओं का उभरता ग्लोबल सेंटर*
वर्तमान में उत्तराखण्ड की औषधि इकाइयों से भारत के 15 से अधिक राज्यों और 20+ देशों को दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। राज्य में स्थित फार्मा कंपनियां WHO-GMP, ISO, और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य कर रही हैं।धामी सरकार का ध्यान सिर्फ कारोबार को बढ़ावा देने पर ही नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने पर है कि यहां की दवाएं विश्व स्तरीय गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरें।

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें