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-कैसे भाजपा में गुटबाजी की बड़ी वजह बन रहा वामपंथी सलाहकार

-राजनीतिक विरासत को दांव पर लगाने वाले लिए जा रहे फैसलों की पोल खोलती रपट

देहरादून। यहां किसी का सत्य परेशान नहीं होता। यहां हर कालखंड का बराबर हिसाब होता है। भले ही वो 2016 के बाद का हो या 2000 से 2016 के बीच का सत्य। पहले पिता और अब खुद जिसकी राजनीति में बैकडोर एंट्री हुई हो, वो सत्यवान की पुत्री सत्य की देवी यदा यदा ही धर्मस्य जैसे गीता के पवित्र श्लोक का अपमान करते हुए, अपने झूठे अहंकार, अति महत्वकांक्षा में अपने अधूरे, पक्षपात भरे न्याय को आधार बना कर चौथे तल पर पहुंचना चाहती हैं। सत्य की देवी कहती हैं की ये लड़ाई किसी व्यक्तिगत के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई है। हे सत्य की देवी ये अन्याय के खिलाफ कैसी लड़ाई है, जिसके दोहरे मापदंड हैं। ये भागवत गीता का कौन सा अध्याय है, जिस पर आजतक आपके और आपके दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव वाले सलाहकारों के साथ ही आपके दाढ़ी वाले सलाहकार की ही नजर पड़ी। बाकी इस ज्ञान से आजतक अछूते हैं। भागवत करने वाले तमाम व्यास असमंजस में हैं की कैसे वो इस अद्भुत ज्ञान से अछूते रह गए।
ये 2016 से पहले वालों को लेकर आपका कौन सा प्रेम है, जिसके लिए हे देवी आप अपनी साख तक दांव पर लगाने से गुरेज नहीं कर रही हैं। वैसे आपकी मजबूरी समझ सकते हैं। आखिर कैसे पापा के सलाहकार रहे अंकल की अपनी बहन जैसी बेटी, अंकल के बेटे पर प्रहार कर सकती हैं। लेकिन भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण तो यही ज्ञान देते हैं की धर्मयुद्ध में सामने अपना कोई भी सखा, संबंधी खड़ा हो, शस्त्र चलाने में संकोच न करो। ये आपका कौन सलाहकार गीता का ये कौन सा गलत रूप आपको थमा कर चला गया है। जिसमें 2016 के बाद और 2016 से पहले वालों के लिए अलग अलग नियमों की व्याख्या कर गया।
अब 2016 से पहले के वही बैकडोर वाले 132 आपको अनुभवी नजर आ रहे हैं। यदि वो भी अवैध तरीके से विधायिका के मंदिर में दाखिल हुए हैं और आपको अब अनुभवी नजर आ रहे हैं, तो साफ है की इनके मामले में आप नैनीताल में मौजूद न्याय के मंदिर को भी लगातार गुमराह कर रही हैं।
कैसे महज डेढ़ साल की तदर्थ नौकरी में नियमित हुए कर्मचारियों को बचाकर और उसी सिस्टम में छह साल नौकरी करने वालों को बाहर कर सत्य की देवी बन जाती हो। ये कार्मिक की कौन सी नियमावली आपके हाथ लग गई, जिसके नियम आपके मन मुताबिक चल रहे हैं। क्या इस मामले में उमा देवी केस लागू नहीं होता।
2016 से पहले वालों को लेकर आपकी नियत साफ है की वो आपके कलेजे के टुकड़े हैं। उनके लिए आपको धर्म, न्याय की परिभाषा भी बदलनी पड़े, तो आपको कोई गुरेज नहीं है।
वैसे न्याय, धर्म की परिभाषा अपने मन मुताबिक बदलना आपको विरासत में मिला है। कैसे नेपाली मूल के दो लोगों को फर्जी डोमिसाइल, फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी देकर सरकारी दामाद बना दिया जाता है, ये भी इस राज्य ने देखा है। किसके कालखंड में इस देहरादून की जमीनों को मास्टर प्लान के नाम पर खुर्दबुर्द किया गया। कैसे बासमती लहलहाने वाली खेती की जमीन को बिल्डरों के लिए नीलाम किया गया। कैसे खेतों को कंक्रीट के जंगलों में तब्दील करने की जमीन तैयार की गई। कैसे आम लोगों के घरों की जमीनों को सरकारी कार्यालय भू उपयोग दिखाकर बर्बाद कर दिया गया। आजतक लोग शासन, सरकार के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किसके कालखंड में एक बदमीजाज नौकरशाह ने राज्य में भ्रष्टाचार की सारंगी बजाई। कौन सा शहर का एक छोटा व्यापारी रातों रात देहरादून में कंक्रीट का जंगल खड़ा करता चला गया। किस महिला का नाम देहरादून के मास्टर प्लान की मूल प्रति में ही दर्ज हो गया था। जिसे मिटाने को एमडीडीए के अफसरों को रातों रात दौड़ लगानी पड़ी। किसने टाटा की लखटकिया को उत्तराखंड पंतनगर यूएसनगर नहीं आने दिया।
किसके राज में यूजेवीएनएल में एक इंजीनियर को निदेशक पद के इंटरव्यू में फेल होने के बाद बिना विज्ञापन जारी किए ही विभागीय पदोन्नति के अधिशासी निदेशक के पद पर सीधी नियुक्ति दे दी जाती है। जबकि अधिसासी निदेशक का कोई पद खाली ही नहीं था। इससे भी मन नहीं भरता, कुछ समय बाद वही बैकडोर से अशिसासी निदेशक बना इंजीनियर यूजेवीएनएल एमडी बनने को आवेदन करता है। इस बार एमडी नेताजी के रिश्तेदार को बनाया जाना था, तो इंटरव्यू में फेल होने के बाद भी अगले भाई को सीधे निदेशक बना दिया जाता है। जबकि उस दौरान निदेशक पद के लिए न कोई आवेदन मांगा गया था। न ही कोई इंटरव्यू हुआ। लेकिन नेताजी का मन था, तो नियम क्या होते हैं। क्योंकि धर्म की अपने मन मुताबिक परिभाषित करने का तो कॉपीराइट अगले भाई के परिवार को भगवान श्री कृष्ण देकर ही गए हैं। तो कोई भी संशोधन वो अपने मन मुताबिक कर ही सकते हैं।
उनके ही कार्यकाल में अफसर इतने बेलगाम थे की एक बाहुबली के कारनामों को मीडिया के सामने न आने से रोकने के लिए हरिद्वार रोड पर तत्कालीन पुरानी जेल का एक जेलर पत्रकारों पर लाठियां चलाने से लेकर फायरिंग तक करवा देता है।
इतने कारनामों के बावजूद भी अगले भाई को उत्तराखंड का सबसे ईमानदार नेता कहा जाता है। यदि ये ईमानदारी की परिभाषा है, तो बेईमान कैसे होते होंगे। इसी परंपरा को उसी निष्ठा के साथ सत्य की देवी भी आगे बढ़ा रही हैं। आप में और लाला जी में क्या अंतर रह गया, मायका और ससुराल दोनों वीआईपी और खुद भी वीवीआईपी होने के बाद एक कॉटन, सिल्क का कुछ गज भर कपड़ा अपने बूते नहीं लिया गया। घर की निगरानी को चंद कैमरे तक न खरीदे गए। अपनी गाड़ी को छोड़ सरकारी वाहनों से दिल्ली से मजदूरों तक को लादने में लाज न आई। यमुना कालोनी से बसंत विहार के बीच और भी बहुत कुछ, जो फिलहाल बाद में। ऐसे में तो लाला ही भला, जो कम से कम डंके की चोट पर कहता तो है की हां खाया है।
बेहतर होता की जब उन्होंने न्याय, धर्म, राज्य के बेरोजगारों के साथ न्याय करने को गांडीव उठा ही लिया था, तो न्याय बराबर कर वो इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करातीं। लेकिन ये मौका वे लगातार गंवा रही हैं। उनके पास अभी भी मौका है। नहीं तो उन पर ये गढ़वाली कहावत,

नांगी की नांगी दिखी गई, तिमला का तिमला खती गई, सटीक बैठेगी।

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें