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भाजपा नहीं, कांग्रेस सरकार में हुई जमीनों की असली लूट
भाजपा अध्यक्ष बोले, बिल्डरों को उद्योगों की जमीन नीलाम करने वाली कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झांके
भाजपा ने सरकारी भूमि को लीज पर देने पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को याद दिलाया उसका कार्यकाल
भाजपा बोली कि धामी सरकार में खाली जमीनों को रोजगार का जरिया बनाने पर हो रहा काम
देहरादून। रोजगार और राज्य में पलायन रोकने को सरकारी जमीनों के इस्तेमाल पर कांग्रेस के उठाए जाने वाले सवाल पर भाजपा ने कांग्रेस को आईना दिखाया। भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि
बिल्डरों को उद्योगों की जमीन नीलाम करने वाली कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झांके। कहा कि कांग्रेस अपना इतिहास याद करे।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने अपने समय में बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट की। आईटी पार्क देहरादून की जिस जमीन पर आईटी इंडस्ट्री विकसित होनी थी, वो जमीन बिल्डरों को कौड़ियों के दाम पर कांग्रेस ने बेचा। सिटी पार्क लैंडयूज वाली जमीन का लैंड यूज बिना पैसा जमा करा कर बदल कर करोड़ों के राजस्व का नुकसान राज्य को पहुंचाया। जबकि भाजपा की धामी सरकार में खाली जमीनों को रोजगार का जरिया बनाने पर काम हो रहा है।
कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल के दौरान औद्योगिकीकरण और विकास के नाम पर सिडकुल के माध्यम से बड़े औद्योगिक समूहों, निजी परियोजनाओं को व्यापक स्तर पर भूमि उपलब्ध कराई गई। एनडी तिवारी सरकार के दौर में वर्ष 2006 में पंतनगर में टाटा मोटर्स को लगभग 975 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई। हरिद्वार सिडकुल क्षेत्र में हीरो होंडा को लगभग 265 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी।
वर्ष 2006 में सिडकुल ने एसोटेक सुपरटेक ज्वाइंट वेंचर को पंतनगर में 50 एकड़ भूमि आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आवंटित की गई। कांग्रेस ने ही सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को सिडकुल की भूमि कौड़ियों के भाव में दी। वर्ष 2013 में देहरादून के आईटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को जमीन दी। जिस पर राज्य ऑडिट ने भुगतान और कब्जे की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं।
कहा कि आज जो लोग वर्तमान सरकार पर निजी क्षेत्र को भूमि उपलब्ध कराने का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस सरकारों के समय विकास, उद्योग और आवासीय परियोजनाओं के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को क्यों स्वीकार किया गया था? कहा कि असल मुद्दा निजी क्षेत्र की भागीदारी नहीं, बल्कि नीति की पारदर्शिता, नियमों का पालन और राज्यहित है।
वर्तमान सरकार की नीति स्पष्ट है कि उत्तराखंड की भूमि को बेचा नहीं जा रहा है। जहां आवश्यक हो, वहां निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत लीज के माध्यम से निवेश को आकर्षित करने की व्यवस्था की जा रही है। भूमि का स्वामित्व राज्य के पास ही रहेगा।

धामी सरकार उत्तराखंड के भविष्य को सुधारने पर कर रही काम
कहा कि पर्यटन, वेलनेस, आतिथ्य और अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश से केवल भवन नहीं बनेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास के लिए सरकारी संसाधनों का सुनियोजित उपयोग आवश्यक है। यदि भूमि वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी रहे तो उससे न रोजगार पैदा होता है और न ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को कोई लाभ मिलता है। इसके विपरीत, स्पष्ट शर्तों, पर्यावरणीय मानकों और राज्यहित की सुरक्षा के साथ लीज मॉडल अपनाकर ऐसी भूमि को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार का केंद्र बनाया जा सकता है। कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब उसके शासनकाल में उद्योगों और निजी आवासीय परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराई गई, तब निजी क्षेत्र की भागीदारी विकास का माध्यम थी; लेकिन आज पर्यटन और वेलनेस क्षेत्र में रोजगार और निवेश लाने के लिए लीज नीति अपनाई जा रही है तो वही व्यवस्था उन्हें गलत क्यों लग रही है?

किसी को नहीं दी जा रही जमीन, लीज पर होंगे विकास के काम
कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य किसी को सरकारी संपत्ति बांटना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य के पास रखते हुए लीज मॉडल के माध्यम से निवेश, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। भूमि राज्य की है और राज्य की ही रहेगी। लीज एक निर्धारित अवधि और स्पष्ट शर्तों के अधीन उपयोग का अधिकार है—यह भूमि के मालिकाना अधिकार का हस्तांतरण नहीं है। उत्तराखंड को विकास चाहिए, युवाओं को रोजगार चाहिए और पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत चाहिए। इसलिए सरकार की हर नीति का मूल्यांकन राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि उससे राज्य, स्थानीय लोगों और उत्तराखंड के भविष्य को कितना लाभ मिलता है।

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By amit