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*रेरा पोर्टल से जुड़ेगा मानचित्र स्वीकृति सिस्टम, अवैध निर्माण पर सख्ती के संकेत*

*भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के निर्देश, आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार खत्म, एक हफ्ते में प्रस्ताव मांगे*

*अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार*

राज्य में निर्माण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि राज्य के नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मानचित्र स्वीकृति प्राधिकारियों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। बैठक में रेरा सदस्य नरेश मठपाल, पंकज कुलश्रेष्ठ, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह वर्निया, अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी मुक्ता मिश्रा, संयुक्त निदेशक पंचायती राज एमएस राणा, वरिष्ठ नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव समेत विभिन्न प्राधिकरणों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में रेरा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और निर्माण स्वीकृति से संबंधित जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

*भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के संकेत*
बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। वर्तमान प्रावधान के अनुसार, आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर शुल्क तथा व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है अधिकारियों ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क के कारण आम लोगों को मानचित्र स्वीकृति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

*आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार समाप्त*
बैठक में एक बड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। दरअसल, 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते अब केवल विकास प्राधिकरण ही अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस निर्णय के बाद आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक सर्कुलर जारी कर सभी जिला पंचायतों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

*रेरा के जरिए कॉलोनियों पर कड़ी निगरानी*
बैठक में यह भी तय किया गया कि विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों से बाहर भी यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो वहां रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी और विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अवैध कॉलोनियों और अनियोजित विकास पर रोक लगाई जा सके।

*अवैध निर्माण रोकने के लिए बनेगा कॉमन ड्राफ्ट*
राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई। स्थगित क्षेत्रों में कार्रवाई के दौरान आ रही दिक्कतों को देखते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण रोकने के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, जिससे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इस ड्राफ्ट को जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराया जाए।

*ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता*
बैठक के अंत में आवास सचिव ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस बैठक के फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र में सख्ती के साथ-साथ व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आम लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों पर देखने को मिलेगा।

*मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार*
राज्य में निर्माण और विकास गतिविधियों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बन सके। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित होगी। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर प्राप्त फीडबैक के आधार पर सभी विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि जनमानस को राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति का अधिकार केवल प्राधिकरणों के पास होगा, जिससे एकरूपता बनी रहे। अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि विकास योजनाएं नियमों के अनुरूप हों और आम जनता को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिल सके।

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें