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उत्तराखंड में थर्मल पावर प्लांट लगता तो होता नुकसान, आठ से 10 रुपए प्रति यूनिट की महंगी मिलती बिजली, छह हजार बीघा कृषि भूमि और हर घंटे 50 लाख लीटर पानी होता बर्बाद, भाजपा बोली राज्य की यही बर्बादी चाहती थी कांग्रेस

देहरादून। छत्तीसगढ़ की जगह उत्तराखंड में थर्मल पावर प्लांट लगाने की नसीहत देने वाले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने करारा जवाब दिया है। उन्हें आईंना दिखाते हुए बताया कि यदि उत्तराखंड में थर्मल पावर प्लांट लगता तो राज्य की जनता को 10 रुपए प्रति यूनिट के रेट से बिजली मिलती, जो आज सिर्फ 5.74 रुपए प्रति यूनिट पर मिलेगी। इसी के साथ राज्य की छह हजार बीघा कृषि भूमि और 50 लाख लीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पानी बर्बाद होता। कांग्र्रेस राज्य की इसी बर्बादी को चाहती थी। जो भाजपा सरकार में मुमकिन नहीं था, तो कांग्रेस नेता अब जनता को गुमराह कर उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनने नहीं देना चाहते हैं।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय से 1320 मेगावाट का थर्मल कोल ब्लॉक आंवटित कराना उत्तराखंड धामी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। इस कोल ब्लॉक का बेहतर इस्तेमाल हो और राज्य की जनता को सस्ती बिजली मिले, इसके लिए सीएम धामी के नेतृत्व में सटीक प्लानिंग की गइ्र। कहा कि केंद्र ने उत्तराखंड को छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक आवंटित किया। इस कोल ब्लॉक से यदि 50 लाख टन कोयला उत्तराखंड लाया जाता तो ट्रांसपोर्टेशन महंगा पड़ता। प्रतिवर्ष रेलवे को ट्रांसपोर्टेशन का 1100 करोड़ का भुगतान करना होता। इससे सीधे बिजली की लागत दो से चार रुपए तक बढ़ जाती। ऐसे में उत्तराखंड को ट्रांसमिशन चार्ज मिला कर छह रुपए प्रति यूनिट मिलने वाली बिजली के रेट आठ से 10 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच जाते।
कहा कि छत्तीसगढ़ से उत्तराखंड पहुंचने वाले कोयले के भंडारण और प्लांट के लिए 6000 बीघा से अधिक की भूमि की व्यवस्था करनी होती। उत्तराखंड में इतनी बड़ी मात्रा में भूमि सिर्फ यूएसनगर, हरिद्वार में ही मौजूद है। वो भी अधिकांश कृषि भूमि है। ऐसे में कृषि भूमि बर्बाद होती। इसके साथ ही जिस जमीन पर ये कोयला आधारित बिजली परियोजना का प्लांट लगाना होता, उसके आस पास का पूरा क्षेत्र प्रदूषण की जद में आ जाता। सालाना एक करोड़ टन से अधिक का कार्बन उत्सर्जन होने से पर्यावरण का बड़ा नुकसान होता।
कहा कि 1320 मेगावाट क्षमता के थर्मल पावर प्लांट को ठंडा रखने को बेतहाशा पानी की जरूरत होती। प्रति घंटा 50 लाख लीटर पानी उपलब्ध कराना होता। आम जनता, पर्यावरण पर पड़ने वाले इन्हीं प्रभावों को देखते हुए धामी सरकार ने सबसे बेहतर निर्णय लिया। अब जनहित का यही निर्णय विपक्ष को परेशान कर रहा है।

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By amit

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