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राजशाही में लोकतंत्र का ढोंग….
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‘लोकतंत्र’ का सिर्फ नाम भर है। दरअसल, हम ‘राजतंत्र’ में रह रहे हैं। उस राजतंत्र में, जिसे लोकतंत्र के नाम पर ही खड़ा किया गया है। लोकतंत्र की जमीन पर ‘राजशाही’ खड़ा करने की शुरुआत दशकों पहले भले ही कांग्रेस ने की, मगर भाजपा, सपा-बसपा, शिवसेना-तृणमूल, राजद-लोजपा, जनता दल-डीएमके जैसे तमाम दल और कुछ हद तक नई-नवेली आप भी इसे लगातार मजबूत करते आ रहे हैं। अपने उत्तराखंड में लोकतंत्र को कमजोर करके राजतंत्र यानी राजशाही को स्थापित करने का काम इधर दो दशकों में बहुत तेज़ हुआ है और भाजपा-कांग्रेस दोनों इसमें बराबर के जिम्मेदार हैं।
लोकतंत्र में हर 5 साल में अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार आमजन के पास होता है। मगर, यह दिखावा भर है। हम विधायक या सांसद के रूप में अपना प्रतिनिधि नहीं चुनते। अधिकांश जगह हम विधायक या सांसद के ‘राजतिलक’ समारोह का हिस्सा बनते हैं। दलों का हाईकमान हर 5 साल में विधानसभा या संसदीय क्षेत्र नामक ‘रियासत’ की ‘प्रजा’ (मतदाता) को फरमान सुनाता है कि यही अबकी बार भी तुम्हारा ‘राजा’ होगा। इसका ही राजतिलक करना तुम्हारी मजबूरी। इस राजशाही में सम्बंधित ‘राज्य’ का राजा कभी अपने ‘वंश’ से बाहर के किसी ‘सेवक’ (कार्यकर्ता) को अवसर नहीं देता। वह 30-40 साल और उससे ज्यादा तक चिपका रहता है ‘सिंहासन’ पर। भले ही एक टांग कब्र में लटक रही हो, भले ही मुंह में दांत-पेट में आंत न हो मगर ‘बिगुल’ बजते ही पुराना राजा फिर सज-संवर कर सामने होता है। यकीं न हो तो उत्तराखंड में भाजपा-कांग्रेस-यूकेडी यानी किसी भी दल की सूची उठाकर देख लें।
इस राजशाही में राजा दिवंगत होता है तो उसकी पत्नी, पुत्र-पुत्री, बहू या भाई को गद्दी सौंपने का फरमान ‘हाईकमान’ से आ जाता है। कोई राजा अपने जीते जी ही अपने बेटे-बेटी या बहू को अडोस-पड़ोस की किसी रियासत (विस् क्षेत्र) में स्थापित करवा लेता है। वहां का पुराने से पुराना कार्यकर्ता खुद आगे बढ़ पाने की आस पर वज्रपात सहते हुए भी इन पत्नियों, पुत्र-पुत्रियों, बहुओं यानी ‘राज वंशियों’ का ‘अनुसेवक’ बनकर इनकी जय-जयकार करता रह जाता है।

 

वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री जितेंद्र अंथवाल की कलम से

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By amit

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*उत्तराखण्ड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन* अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता शामिल नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान 8 जून से उत्तराखण्ड में हुई थी एसआईआर की शुरुआत 14 जुलाई को किया गया था ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संपादित किया गया। उत्तराखण्ड में इस 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद 14 जुलाई 2026 को प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु होने के दिन दिनांक 8 जून 2026 को प्रदेश में 7960762 मतदाता शामिल थे। गणना फार्म वितरण एवं संकलन के बाद प्रदेश में 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया जिसमें 7133785 मतदाता मतदाता सूची में शामिल हुए। आयोग द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक मतदाताओं को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 से 28 सितंबर 2026 तक प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया गया। दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया जिसमें 7158949 मतदाता सूची में शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल मतदेय स्थलों की संख्या 12543 है। अंतिम मतदाता सूची में शामिल 7158949 मतदाताओं में (3421036 महिला, 3737701 पुरुष, 212 थर्ड जेंडर मतदाता) शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 18-19 आयुवर्ग में 72656 मतदाता, एवं 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के 122892 मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दावे आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में कुल 129872 नए मतदाता शामिल किए गए हैं जबकि 104708 मतदाताओं को नियमानुसार सूची से विलोपित किया गया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाईट www.voter.eci.gov.in एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाईट www.ceo.uk.gov.in पर ऑनलाइन विजिट कर देखी जा सकती है। इसके साथ हीं डीईओ / ईआरओ कार्यालय एव बीएलओ से भी सूची प्राप्त की जा सकती है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ऐसे व्यक्ति जो किन्ही कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं वे सभी फार्म 6 भरकर ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन एवं अपने बीएलओ के माध्यम से ऑफलाइन मोड में भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे और बीएलओ को घर-घर जाकर जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। 1- बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची का प्री-एसआईआर से पहले की सूची से मिलान करेंगे। वे ऐसे वोटरों की पहचान करेंगे जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में शामिल थे, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं हैं, और ऐसे वोटरों की एक लिस्ट तैयार करेंगे। 2- बीएलओ चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और जो लोग योग्य पाए जाएंगे, उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरवाने में मदद करेंगे। 3- बीएलओ घर-घर जाने के दौरान यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो मतदाता छूट गए हैं, पहली बार मतदान देने वाले हैं या युवा मतदाता हैं, उनके लिए फॉर्म 6 भरा जाए। 4- बीएलओ इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के साथ साझा करेंगे। 5- इस प्रक्रिया के आखिर चरण में ईआरओ बूथवार सूची को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा करेंगे, ताकि उन्हें छूटे हुए मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करवाने का एक और अवसर मिल सके। 6- इसके साथ ही, मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने हेतु आवेदन जमा करने में आसानी हो इसके लिए बूथ लेवल कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ-साथ बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगें