टीबी उन्मूलन हेतु व्यापक रणनीति पर मंथन
जोखिम-आधारित स्क्रीनिंग, रोकथाम और युवा आबादी पर विशेष फोकस


राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में क्षय रोग उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भारत सरकार के National TB Elimination Programme (NTEP) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुई।
बैठक की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ गीता जैन ने की, जिसमें नेशनल एवं स्टेट टास्क फोर्स के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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👩⚕️ युवा आबादी और कुपोषण पर चिंता – डॉ गीता जैन
प्राचार्या डॉ गीता जैन ने युवा वर्ग में टीबी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
“युवा आबादी में टीबी की बढ़ती दर केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और पोषण संबंधी चुनौती भी है। कुपोषण रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ता है।”
उन्होंने निर्देश दिए कि पोषण परामर्श और सहायता को टीबी उपचार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए तथा कोई भी मरीज जांच या उपचार से वंचित न रहे।
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🛡️ रोकथाम के बिना उन्मूलन संभव नहीं – डॉ अशोक भारद्वाज
नेशनल टीबी टास्क फोर्स के सदस्य डॉ अशोक भारद्वाज ने कहा:
“टीबी prevention के बिना टीबी उन्मूलन संभव नहीं है। संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए सक्रिय केस खोज, संपर्कों की स्क्रीनिंग और निवारक उपचार अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने हिमाचल प्रदेश में टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए उससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता, डिजिटल मॉनिटरिंग और बेहतर उपचार पालन से सकारात्मक परिणाम संभव हैं।
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🔎 सघन स्क्रीनिंग पर जोर – डॉ अनुराग अग्रवाल
स्टेट टास्क फोर्स सदस्य डॉ अनुराग अग्रवाल ने स्पष्ट किया:
“यदि हम 10 प्रमुख लक्षणों और 8 उच्च-जोखिम श्रेणियों की व्यवस्थित स्क्रीनिंग इनडोर (IPD) और आउटडोर (OPD) दोनों स्तरों पर सुनिश्चित करें, तभी टीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”
10 प्रमुख लक्षण:
• दो सप्ताह से अधिक खांसी
• बलगम में खून
• लगातार बुखार
• रात में पसीना
• वजन में कमी
• भूख में कमी
• सीने में दर्द
• सांस लेने में तकलीफ
• अत्यधिक कमजोरी
• लिम्फ नोड की सूजन
8 उच्च-जोखिम श्रेणियाँ:
• HIV संक्रमित
• मधुमेह रोगी
• कुपोषित व्यक्ति
• पूर्व टीबी रोगी
• टीबी मरीज के निकट संपर्क
• दवा-प्रतिरोधी टीबी संपर्क
• भीड़भाड़/प्रवासी आबादी
• नशा/धूम्रपान करने वाले
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🏥 प्रमुख निर्णय
✔ यूनिवर्सल ड्रग सेंसिटिविटी टेस्टिंग (UDST) सुनिश्चित करना
✔ OPD/IPD दोनों स्तरों पर अनिवार्य लक्षण-आधारित स्क्रीनिंग
✔ सक्रिय केस खोज अभियान को सुदृढ़ करना
✔ निकट संपर्कों की जांच और निवारक उपचार
✔ कुपोषित मरीजों को पोषण सहायता योजनाओं से जोड़ना
✔ डिजिटल मॉनिटरिंग एवं उपचार पालन की सख्त निगरानी
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🎯 लक्ष्य
• प्रारंभिक पहचान (Early Detection)
• संक्रमण की श्रृंखला तोड़ना
• मृत्यु दर में कमी
• उपचार सफलता दर में वृद्धि
• 2025 तक टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य में सक्रिय योगदान
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय जनस्वास्थ्य की रक्षा एवं टीबी मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है और समन्वित, वैज्ञानिक एवं मानवीय दृष्टिकोण से कार्य कर रहा है।
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